*चौबीसवें बोले – श्रावक के पच्चक्खाण के उन्नपचास (49) भंग*
नौ अंक – 11, 12, 13, 21, 22, 22, 23, 31, 32, 33
*इसमें प्रथम अंक "करण" और दूसरा अंक "योग" रूप है I*
*अंक 11 के भंग 9*
अर्थात एक करण और एक योग से
(यहाँ पहले अंक 1 का अर्थ है - एक करण और दूसरे अंक 1 का अर्थ है - एक योग। 9 भांगे हो सकते हैं) जैसे -
1. करूँ नहीं मन से।
2. करूँ नहीं वचन से।
3. करूँ नहीं काया से।
4. कराऊँ नहीं मन से।
5. कराऊँ नहीं वचन से।
6. कराऊँ नहीं काया से।
7. अनुमोदूँ नहीं मन से।
8. अनुमोदूँ नहीं वचन से।
9. अनुमोदूँ नहीं काया से।
*अंक 12 के भंग 9*
अर्थात एक करण और दो योग से
(यहाँ पहले अंक 1 का अर्थ है - एक करण और दूसरे अंक 2 का अर्थ है - दो योग। 9 भांगे हो सकते हैं) जैसे -
1. करूँ नहीं - मन से, वचन से।
2. करूँ नहीं - मन से, काया से।
3. करूँ नहीं - वचन से, काया से।
4. कराऊँ नहीं - मन से, वचनसे।
5. कराऊँ नहीं - मन से, काया से।
6. कराऊँ नहीं - वचन से, काया से।
7. अनुमोदूँ नहीं - मन से, वचन से।
8. अनुमोदूँ नहीं - मन से, काया से।
9. अनुमोदूँ नहीं - वचन से, काया से।
*अंक 13 के भंग 3*
अर्थात एक करण और तीन योग से
(यहाँ पहले अंक 1 का अर्थ है - एक करण और दूसरे अंक 3 का अर्थ है - तीन योग। 3 भांगे हो सकते हैं) जैसे -
1. करूँ नहीं मन से, वचन से, काया से।
2. कराऊँ नहीं मन से, वचन से, काया से।
3. अनुमोदूँ नहीं मन से, वचन से, काया से।
*अंक 21 के भंग 9*
अर्थात दो करण और एक योग से
(यहाँ पहले अंक 2 का अर्थ है - दो करण और दूसरे अंक 1 का अर्थ है - एक योग। 9 भांगे हो सकते हैं) जैसे -
1. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं - मन से।
2. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं - वचन से।
3. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं - काया से।
4. करूँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से।
5. करूँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - वचन से।
6. करूँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - काया से।
7. कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से।
8. कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - वचन से।
9. कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - काया से।
*अंक 22 के भंग 9*
अर्थात दो करण और दो योग से
(यहाँ पहले अंक 2 का अर्थ है - दो करण और दूसरे अंक 2 का अर्थ है - दो योग। 9 भांगे हो सकते हैं) जैसे -
1. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं - मन से, वचन से।
2. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं - मन से, काया से।
3. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं - वचन से, काया से।
4. करूँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, वचन से।
5. करूँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, काया से।
6. करूँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - वचन से, काया से।
7. कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, वचन से।
8. कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, काया से।
9. कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - वचन से, काया से।
*अंक 23 के भंग 3*
अर्थात दो करण और तीन योग से
(यहाँ पहले अंक 2 का अर्थ है - दो करण और दूसरे अंक 3 का अर्थ है - तीन योग। 3 भांगे हो सकते हैं) जैसे –
1. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं - मन से, वचन से, काया से।
2. करूँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, वचन से, काया से।
3. कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, वचन से, काया से।
*अंक 31 के भंग 3*
अर्थात तीन करण और एक योग से
(यहाँ पहले अंक 3 का अर्थ है - तीन करण और दूसरे अंक 1 का अर्थ है - एक योग। 3 भांगे हो सकते हैं) जैसे -
1. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से।
2. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - वचन से।
3. करूँ नहीं , कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - काया से।
*अंक 32 के भंग 3*
अर्थात तीन करण और दो योग से
(यहाँ पहले अंक 3 का अर्थ है - तीन करण और दूसरे अंक 2 का अर्थ है - दो योग। 3 भांगे हो सकते हैं) जैसे –
1. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, वचन से।
2. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, काया से।
3. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - वचन से, काया से।
*अंक 33 के भंग 1*
अर्थात तीन करण और तीन योग से
(यहाँ पहले अंक 3 का अर्थ है - तीन करण और दूसरे अंक 3 का अर्थ है - तीन योग। 1 भांगा हो सकता है) जैसे
१. करूँ नहीं, कराऊँ नहीं, अनुमोदूँ नहीं - मन से, वचन से, काया से।
व्रत नियम या त्याग प्रत्याखान को ग्रहण करने के जितने प्रकार/विकल्प अधिक से अधिक हो सकते है, उन्हें भंग कहते है।
ये भंग 3 करण 3 योग के आधार पर बनाए गए है, करण मतलब करना नहीं, कराना नहीं, करते हुए की अनुमोदना करना नहीं( मतलब करते हुए की तारीफ करना)
और 3 योग मतलब मन वचन और काया से।
श्रावक इन 49 भंग में से किसी भी भंग से पच्चक्खाण कर सकते है, साधु जी के 33 वे भंग से पच्चक्खाण होते है।
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