आज वैशाख वद १३ श्री शांतिनाथ भगवान का जन्म और मोक्ष कल्याणक है।
श्री शांतिनाथ प्रभु के 12 भव हुए। पूर्व भव में प्रभु की आत्मा सर्वार्थसिद्ध नाम के विमान में थी। वहां 33 सागरोपम का आयुष्य पूर्ण करके वहा रहेल मतिज्ञान , श्रुतज्ञान और अवधिज्ञान के साथ इक्ष्वाकुवंश के कश्यप गोत्र के कुरु देश की हस्तिनापुर नगरी के राजा विश्वसेन की अचिरा राणी की कुक्षी में श्रावण वद 7 के दिन मेष राशि और भरणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में च्यवन हुआ। तब माता ने 14 स्वप्न देखे।
प्रभु माता के उदर में 9 माह 6 दिन रहे। वैशाख वद 13 के दिन भरणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में जन्म हुआ। 56 दिक्ककुमारीकाओ ने आकर सूति कर्म किया। 64 इन्द्रो ने मेरु पर्वत पे 1 करोड़ 60 लाख कलशों से प्रभु का जन्माभिषेक किया।
श्री शांतिनाथ भगवान का चैत्यवंदन
शांति जिनेश्वर सोलमा ,अचिरा सुत वंदो,
विश्वसेन कुल नभोमणि ,भविजन सुख कंदो।
मृग लंछन जिन आउखु ,लाख वरस प्रमाण,
हत्थीणाउर नयरी धणी , प्रभुजी गुण मणि खाण ।
चालिश धनुषनी देहड़ी ,सम चउरस संठान,
वदन पद्म ज्यु चंदलो, दीठे परम कल्याण ।
थोय
शान्ति सुहंकर साहिबो, संयम अवधारे,
सुमित्रने घेर पारणु, भव पार उतारे।
विचरंता अवनितले, तप उग्र विहारे,
ज्ञान ध्यान एकतानथी, तिर्यंचने तारे ।
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