समाधि मरण को सुलभ करनार श्री वद दशमी तप आराधना विधि ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आ तप द्वारा पुरुषादानीय श्री पार्श्वनाथ प्रभुना जन्म अने दीक्षा कल्याणकनी आराधना थाय छे. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आ तपमां मागशर वद 9 ना साकरना पाणीनुं एकासणुं(ठाम चौविहार) ~~~~~~~~ मागशर वद 10 (जन्म कल्याणक दिन)नां खीरनुं एकासणुं करवानुं होय छे. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मागशर वद 11 (दिक्षा कल्याणक दिन)नां भर्या भाणानुं करवानुं होय छे. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ दश वर्ष अने दश महिना सुधी दर महिनानी वद दशमे एकासणुं करवाथी आ तप पूरो थाय छे. साथिया 12, खमासमण 12, प्रदक्षिणा 12, 12 लोग्गस्सनो काउसग्ग, नवकारवाळी 20, तेमज उभयटंक प्रतिक्रमण-पडिलेहण, त्रिकाळ देववंदन, ब्रह्मचर्यनुं पालन वगेरे करवानुं होय छे. साडा बार हजारनो जाप करवो होय तेमणे पहेला दिवसे 40 नवकारवाळी बीजा दिवसे 45 नवकारवाळी त्रीजा दिवसे 40 नवकारवाळी गणवानी. नवकारवाळीनुं पद:- ॐ र्ह्रीं श्री पार्श्वनाथ अर्हंते नम: काउसग्गनुं पद खमासमण आपीने 'इच्छाकारेण संदिसह भगवन् ! बारगुणयुक्त धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ आराधनार्थे काउसग्ग करूं ? इच्छं बारगुणयुक्त धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ आराधनार्थे करेमि काउसग्गं ' वंदणवत्तियाए..... 'अन्नत्थ' बोली बार लोगस्सनो काउसग्ग 'चंदेसु निम्मलयरा' सुधी करवो, पारी प्रगट लोगस्स बोलवो. श्री शंखेश्वर भगवाननी बार प्रदक्षिणा अने खमासमणाना दुहा सकल समीहित पूरवा, कल्पवृक्ष अवतार, पार्श्व प्रभु प्रसन्न सदा, शंखेश्वर सुखकार. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं अशोकवृक्ष प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर
पार्श्वनाथाय नम :
(1) सकल मनोरथ पुरवा, मंगल केलिनिवास, वामानंदन वंदिए, श्री शंखेश्वर पास. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं सुरपुष्पवृष्टि प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(2) प्रणमुं प्रेमे पास जिन, श्री शंखेश्वर देव, सुर नरवर किन्नर सदा, जेहनी लारे सेव. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं दिव्यध्वनी प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(3) सकल सुहंकर पासजी, शंखेश्वर शिरदार, शंखेश्वर केशव जरा, हरत करत उपकार. श्री शंखेश्वर साहिबो, सुरतरू सम अवदात; पुरिषादानी पासजी, षड् दर्शन विख्यात, ॐ र्ह्रीं र्श्रीं चामरयुगल प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(4) सकल सिद्धिदायक सदा, शंखेश्वर प्रभु पास, प्रणमुं पदकज प्रेमथी, आणी मन उल्लास. सकल कुशल कमलावली, भासक भाण समान, श्री शंखेश्वर पासना, चरण नमुं धरी ध्यान. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं सिंहासन प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(5) श्री शंखेश्वर पासजी, हरि जरा हरनार, तस प्रणमुं प्रेमे करी, शिवरमणी उरहार. श्री शंखेश्वर पासजी, प्रणमुं एहना पाय, अश्वसेन राजा कुळे, जनम्या श्री जिनराय. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं भामंडल प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(6) दुरित टळे वंछित फळे, जो नाम समरंत, श्री शंखेश्वर पास जिन, ते प्रणमुं एकांत. श्री शंखेश्वरधणी, प्रणमी पास जिणंद, नाम जपंता जेहनुं आपे परमानंद. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं देवदुंदुभी प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(7) श्री शंखेश्वर पास जिन, प्रणमोपद अरविंद, अश्वसेन नृप कुलतिलो, वामादेवी नंद. इंद्र चंद्र नागेन्द्र नर, सेवा सारे सार, पास शंखेश्वर प्रणमतां, सफल हुए अवतार. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं छत्रत्रय प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(8) श्री शंखेश्वर सुखकरुं, नमतां नवे निधान, विघन विदारण वीरवार, वसुधा वाध्यो वान. श्री शंखेश्वर पास जिन, प्रणत पुरंदर देव, अलिय विघन दूरे हरे-करे जास सुर सेव. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं ज्ञानातिशय प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(9) श्री शंखेश्वर पासजी, मोटो महिमा जास, चिंतामणी चिंता हरी, आपे लील-विलास. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं वचनातिशय प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(10) सकल समीहित सुरलता, सिंचन नवजलधार, श्री शंखेश्वर पासजी, प्रणमुं प्राण आधार. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं पूजातिशय प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
(11) सकल मनोरथ पूरवे, श्री शंखेश्वर पास, परचा पूरण प्रणमीए, लहीए लील-विलास. अश्वसेन कुलध्वज समो, वामा केरो नंद, श्री शंखेश्वर प्रणमतां, होवे नित आनंद. ॐ र्ह्रीं र्श्रीं अपायापगमातिशय प्रातिहार्य युक्ताय, धरणेन्द्र पद्मावती परिपूजिताय श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथाय नम :
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