Friday, 8 May 2020

10 Yati dharma 10 यति धर्म

दश -यति धर्म 

 श्रमण के द्वारा पालने योग्य दस प्रकार का धर्म   हैं।
1. क्षमा धर्म -क्रोध कषाय रुपी शत्रु को जीतने के लिए । श्रमण (यति) का सबसे पहला क्षमा धर्म  हैं।
क्षमा धर्म का दूसरा नाम क्षंति / खंति / क्षान्ति ।
क्षमा धर्म का गजसुकुमाल ,अर्जुनमाली , आदि ने पूर्ण रुपेण पालन किया।

2.मुनि का दुसरा धर्म  हैं मुत्ति +निर्लोभ ।
लोभ को निर्लोभता से (संतोष से ) द्वारा जीता जा सकता हैं।
निर्लोभता से संतोष गुण की  प्राप्ति होती हैं।

3. छल कपट का त्याग करना आर्जव धर्म - सरलता धर्म हैं। 
माया कषाय को आर्जवता से (सरलता से )जीता जा सकता हैं।

4. श्रमण का चौथा धर्म मार्दव धर्म - मृदृता विनम्रता हैं।
विनम्रता से विनय गुण  आता हैं।
धर्म सरल व्यक्ति के शुद्ध  ह्रदय में ठहरता हैं।
अभिमान का निग्रह मार्दव धर्म करता हैं।
मार्दवता से आठ प्रकार के मद - जाति ,कुल,बल, रुप,तप, श्रुत ,लाभ, ऐश्वर्य , मद के अभिमान को जीता जाता हैं।

5. श्रमण का पाँचवा धर्म लाघव - लघुता हैं।
  ममत्व को लाघव धर्म से जीता जाता हैं।

6.मुनि का छठा धर्म सत्य धर्म  हैं।
असत्य रुपी शत्रु को सत्य धर्म  से जीता जा सकता हैं।

7. साधु का सातवां धर्म संयम धर्म  हैं।
इंद्रियों को वश में करने से संयम धर्म  होता हैं।

8.श्रमण का आठवां धर्म तप धर्म हैं।
करोडो़ं भवो के संचित कर्म तप धर्म से नष्ट होते हैं।

9.श्रमण का नवमां त्याग धर्म हैं l

10.साधु के दसवें धर्म का नाम ब्रह्मचर्य धर्म हैंl

No comments:

Post a Comment

Mahabalipuram

...........*जिनालय दर्शन*........... *महाबलीपुरम तीर्थ* लॉकडाउन के चलते हमारी कोशिश है कि प्रतिदिन आपको घर पर प्रभु दर्शन करा सकें। आज हम आप...